The Vision of Śiva· 1.26 / 49

The Vision of Śiva1.26

1.26
बुद्धिं विना कथं बोधः सा बुद्धिः प्रकृतेः प्रजा । न च तस्य तया योग इति चेदपरस्थितौ ॥२६॥
buddhiṃ vinā kathaṃ bodhaḥ sā buddhiḥ prakṛteḥ prajā | na ca tasya tayā yoga iti cedaparasthitau
— बुद्धि के बिना ; — कैसे ; — बोध ; — वह ; — बुद्धि ; — प्रकृति की ; — सन्तान ; — और नहीं ; — उसका (शिव का) ; — उसके साथ ; — योग ; — यदि ऐसा कहो ; — अपर (निम्न) अवस्था में

(आक्षेप:) 'बुद्धि के बिना बोध कैसे? और वह बुद्धि तो प्रकृति की सन्तान है, तथा उसका (शिव का) उसके साथ योग नहीं' — यदि ऐसा कहो, (तो उत्तर: योग है, किन्तु) अपर अवस्था में।