The Vision of Śiva· 1.25 / 49

The Vision of Śiva1.25

1.25
औन्मुख्याभावतस्तस्य निवृत्तिर्निर्वृतिं विना । द्वेष्ये प्रवर्तते नैव न च वेत्ति विना चितम् ॥२५॥
aunmukhyābhāvatastasya nivṛttirnirvṛtiṃ vinā | dveṣye pravartate naiva na ca vetti vinā citam
— उन्मुखता के अभाव से ; — उसकी ; — निवृत्ति ; — निर्वृति के बिना ; — द्वेष्य (वस्तु) में ; — प्रवृत्त होता है ; — नहीं ही ; — और नहीं ; — जानता है ; — बिना ; — चित् के

उन्मुखता के अभाव से उसकी निवृत्ति (होगी), किन्तु निर्वृति (आनन्द-विश्रान्ति) के बिना नहीं; द्वेष्य वस्तु में वह प्रवृत्त ही नहीं होता, और चित् के बिना कुछ भी नहीं जानता।