The Vision of Śiva1.27
सा बुद्धिर्यत् पुनः सूक्ष्मं सर्वदिक्कं व्यवस्थितम् ।
ज्ञानं बोधमयं तस्य शिवस्य सहजं सदा ॥२७॥
sā buddhiryat punaḥ sūkṣmaṃ sarvadikkaṃ vyavasthitam |
jñānaṃ bodhamayaṃ tasya śivasya sahajaṃ sadā
— वह ; — बुद्धि ; — जो किन्तु, जबकि ; — फिर, दूसरी ओर ; — सूक्ष्म ; — सर्वदिक्-व्यापी ; — व्यवस्थित ; — ज्ञान ; — बोधमय ; — उस ; — शिव का ; — सहज (स्वाभाविक) ; — सदा किन्तु वह जो सूक्ष्म, सर्वदिक्-व्यापी, व्यवस्थित बोधमय ज्ञान है, वह उस शिव का सदा सहज (स्वाभाविक) है।