The Vision of Śiva· 1.19 / 49

The Vision of Śiva1.19

1.19
यत इच्छति तज्ज्ञातुं कर्तुं वा सेच्छया क्रिया । तस्याः पूर्वापरौ भागौ कल्पनीयौ पुरा हि या ॥१९॥
yata icchati tajjñātuṃ kartuṃ vā secchayā kriyā | tasyāḥ pūrvāparau bhāgau kalpanīyau purā hi yā
— क्योंकि, जिससे ; — इच्छा करता है ; — उसे ; — जानने को ; — करने को ; — अथवा ; — वह ; — इच्छा से ; — क्रिया ; — उसके ; — पूर्व और अपर ; — दो भाग ; — कल्पित करने योग्य ; — पहले ; — निश्चय ही ; — जो

क्योंकि उस इच्छा से वह उसे जानने अथवा करने की इच्छा करता है, यही क्रिया है; और उसके दो भाग — पूर्व और अपर — कल्पित करने योग्य हैं, जो पहले है (वही इच्छा है)।