1.20 अनन्तरं हि तत्कार्यज्ञानदर्शनशक्तिता ॥२०॥ anantaraṃ hi tatkāryajñānadarśanaśaktitā anantaram — तत्काल, अनन्तर ; hi — निश्चय ही ; tatkāryajñānadarśanaśaktitā — उस कार्य के ज्ञान और दर्शन की शक्ति और तत्काल ही उस कार्य के ज्ञान और दर्शन की शक्ति (होती है)।