The Vision of Śiva· 1.16 / 49

The Vision of Śiva1.16

1.16
किंचिदुच्छूनता सैव महद्भिः कैश्चिदुच्यते । तस्येच्छा कार्यतां याता यया सेच्छः स जायते ॥१६॥
kiṃciducchūnatā saiva mahadbhiḥ kaiściducyate | tasyecchā kāryatāṃ yātā yayā secchaḥ sa jāyate
— किंचित् उच्छूनता (थोड़ा-सा उभार) ; — वह ; — ही ; — महान् पुरुषों द्वारा ; — कुछ (लोगों) द्वारा ; — कही जाती है ; — उसकी ; — इच्छा ; — कार्य की ओर उन्मुखता को ; — प्राप्त हुई ; — जिससे ; — सेच्छ (इच्छावान्) ; — वह ; — हो जाता है

उसी (उन्मुखता) को कुछ महान् पुरुष 'किंचित् उच्छूनता' (थोड़ा-सा उभार) कहते हैं; यह उसकी इच्छा है जो कार्य की ओर उन्मुख हो गई है, जिससे वह सेच्छ (इच्छावान्) हो जाता है।