Parātrīśikā· 1.5 / 36

Parātrīśikā1.5

1.5
अथाद्यास् तिथयः सर्वे स्वरा बिन्द्ववसानकाः । तदन्तः कालयोगेन सोमसूर्यौ प्रकीर्तितौ ॥५॥
athādyās tithayaḥ sarve svarā bindvavasānakāḥ | tadantaḥ kālayogena somasūryau prakīrtitau
— अब, तब (मंगल आरम्भ) ; — आद्य, प्रथम ; — तिथियाँ — यहाँ स्वर ; — सब ; — स्वर ; — बिन्दु (अनुस्वार) पर अन्त होने वाले ; — उसके अन्त में ; — काल के योग से — समय के संयोग से ; — सोम और सूर्य — अन्तिम दो (ं और ः) ; — घोषित किए गए, कहे गए

अब, सब आदि तिथियाँ बिन्दु में अन्त होने वाले स्वर हैं; उनके अन्त में, काल के योग से, सोम और सूर्य (अन्तिम दो — ं और ः) घोषित किए गए हैं।