Parātrīśikā· 1.25 / 36

Parātrīśikā1.25

1.25
तथा हृदयबीजस्थं जगद् एतच् चराचरम् । एवं यो वेत्ति तत्त्वेन तस्य निर्वाणगामिनी ॥२५॥
tathā hṛdayabījasthaṃ jagad etac carācaram | evaṃ yo vetti tattvena tasya nirvāṇagāminī
— वैसे ही, उसी प्रकार ; — हृदय-बीज में स्थित (हृदय-बीज) ; — जगत् — विश्व ; — यह ; — चराचर — चर और अचर (सजीव-निर्जीव) ; — इस प्रकार ; — जो कोई ; — जानता है ; — तत्त्वतः, यथार्थ रूप में ; — उसके लिए, उसकी ; — (दीक्षा) निर्वाण की ओर ले जाने वाली

वैसे ही यह सम्पूर्ण चराचर जगत् हृदय-बीज में स्थित है। जो इसे इस प्रकार तत्त्वतः जान लेता है, उसके लिए (दीक्षा) निर्वाण की ओर ले जाने वाली होती है।