— सर्वगत — सर्वव्यापी; — निर्मल — मलरहित; — स्वच्छ — पारदर्शी; — तृप्त — परिपूर्ण; — स्व-आश्रयी — अपने ही आधार में स्थित; — शुचि — पवित्र; — जैसे, जिस प्रकार; — वट के बीज में स्थित (न्यग्रोध-बीज); — शक्ति-रूप में — सम्भावना-रूप में; — महावृक्ष — विशाल वृक्ष
सर्वगत, निर्मल, स्वच्छ, तृप्त, स्व-आश्रयी और शुचि — जैसे वट के बीज में महावृक्ष शक्ति-रूप (सम्भावना-रूप) में स्थित रहता है,