Parātrīśikā· 1.23 / 36

Parātrīśikā1.23

1.23
अणुर् विशुद्धम् अचिराद् ऐस्वरं ज्ञानम् अश्नुते । तच्चोदकः शिवो ज्ञेयः सर्वज्ञः परमेश्वरः ॥२३॥
aṇur viśuddham acirād aisvaraṃ jñānam aśnute | taccodakaḥ śivo jñeyaḥ sarvajñaḥ parameśvaraḥ
— अणु — बद्ध जीव (चेतना का बँधा हुआ अणु) ; — विशुद्ध, परिशुद्ध ; — शीघ्र ही, अचिर में ; — ऐश्वर — ईश्वर-सम्बन्धी (यथा-प्रसारित) ; — ज्ञान, बोध ; — प्राप्त करता है, पाता है ; — उसका प्रेरक — उसे उद्बुद्ध करने वाला ; — शिव ; — जानने योग्य है ; — सर्वज्ञ ; — परमेश्वर — परम स्वामी

अणु (बद्ध जीव) शीघ्र ही विशुद्ध, ऐश्वर ज्ञान को प्राप्त करता है; और उसका प्रेरक शिव जानने योग्य है — सर्वज्ञ परमेश्वर।