muhūrtaṃ smarate yas tu cumbake nābhimudritaḥ |
sa badhnāti tadā dehaṃ mantramudrāgaṇaṃ naraḥ
— एक मुहूर्त के लिए; — स्मरण करता है, चिन्तन करता है; — जो (पुरुष); — किन्तु, ही; — संगम-स्थल पर — मिलन-बिन्दु पर (चुम्बक); — नाभि पर मुद्रित (नाभि-मुद्रा से); — वह; — बाँध लेता है; — तब; — देह को; — मन्त्रों और मुद्राओं के समूह-रूप में; — पुरुष, मनुष्य
जो पुरुष नाभि पर मुद्रित होकर, संगम-स्थल पर एक मुहूर्त के लिए भी इसका स्मरण करता है, वह तब अपने देह को मन्त्रों और मुद्राओं के समूह-रूप में बाँध लेता है।