Parātrīśikā· 1.10 / 36

Parātrīśikā1.10

1.10
एतन् ना योगिनीजातो ना रुद्रो लभते स्फुटम् । हृदयं देवदेवस्य सद्यो योगविमोक्षदम् ॥१०॥
etan nā yoginījāto nā rudro labhate sphuṭam | hṛdayaṃ devadevasya sadyo yogavimokṣadam
— इसे, इस (हृदय) को ; — न (कोई पुरुष/जन — यहाँ 'न ही') ; — योगिनी से उत्पन्न (योगिनी-संतान) ; — न (कोई — 'और न') ; — रुद्र ; — प्राप्त करता है, पाता है ; — स्पष्ट रूप से, प्रकट रूप से ; — हृदय ; — देवों के देव का ; — तत्काल, तुरन्त ; — योग और मोक्ष प्रदान करने वाला

न तो योगिनी से उत्पन्न कोई और न ही कोई रुद्र इसे स्पष्ट रूप से पाता है — देवों के देव का यह हृदय, जो तत्काल योग और मोक्ष प्रदान करता है।