— यह; — योनि — गर्भ, स्रोत; — भली प्रकार कही गई, घोषित; — समस्त तन्त्रों में; — सदा; — चौदहवें (स्वर औ) से युक्त; — हे भद्रे — मंगलमयी; — तिथीश के अन्त (विसर्ग ः) से समन्वित; — तृतीय — तीसरा (बीज/ब्रह्म); — ब्रह्म — यहाँ पवित्र बीजाक्षर; — हे सुश्रोणि — सुन्दर श्रोणि वाली; — हृदय — सार, बीज (सौः); — भैरव-स्वरूप का — जिसका स्वभाव भैरव है
यह योनि समस्त तन्त्रों में सदा भली प्रकार कही गई है। हे भद्रे, चौदहवें (स्वर औ) से युक्त, तिथीश के अन्त (विसर्ग) से समन्वित — हे सुश्रोणि, यह तृतीय ब्रह्म ही भैरव-स्वरूप का हृदय है।