— मूलरहित — बिना मूल के (अकार, 'मूलहीन' स्वर से आरम्भ); — उसी क्रम वाली (अ … क्ष); — जाननी चाहिए; — 'क्ष' पर अन्त होने वाली; — सृष्टि — अक्षरों का उद्भव-क्रम (वर्णों का ब्रह्मांडीय उद्गार); — कही गई, उदाहृत है; — समस्त की; — और निश्चय ही (च + एव); — मन्त्रों की; — विद्याओं की — (स्त्रीलिंग मन्त्र/ज्ञान-सूत्र); — और; — हे यशस्विनि — कीर्तिमती
मूलरहित, उसी क्रम वाली, 'क्ष' पर अन्त होने वाली — यह सृष्टि (अक्षर-उद्भव) जाननी चाहिए, जो हे यशस्विनि, समस्त मन्त्रों और विद्याओं की (उत्पत्ति-स्रोत) कही गई है।