Parātrīśikā· 1.7 / 36

Parātrīśikā1.7

1.7
वाय्वग्निसलिलेन्द्राणां धारणानां चतुष्टयम् । तदूर्ध्वे शादिविख्यातम् पुरस्ताद् ब्रह्मपञ्चकम् ॥७॥
vāyvagnisalilendrāṇāṃ dhāraṇānāṃ catuṣṭayam | tadūrdhve śādivikhyātam purastād brahmapañcakam
— वायु, अग्नि, सलिल और इन्द्र की (चार धारणा-तत्त्व) ; — धारणाओं की ; — चतुष्टय — चार का समूह ; — उससे ऊपर ; — 'श' से आरम्भ होने वाला कहा गया (ऊष्म वर्ण) ; — आगे, सबसे प्रथम ; — ब्रह्म-पञ्चक — ब्रह्म के पाँच (श ष स ह क्ष)

(तदनन्तर) वायु, अग्नि, सलिल और इन्द्र की धारणाओं का चतुष्टय है; उससे ऊपर, सबसे आगे, 'श' से आरम्भ होने वाला कहा गया ब्रह्म-पञ्चक (श ष स ह क्ष) है।