सुखादिषु च सौख्यादिहेतुष्व् अपि च वस्तुषु
अवभासस्य सद्भावे ऽप्य् अतीतत्वात् तथा स्थितिः ॥३॥
sukhādiṣu ca saukhyādihetuṣv api ca vastuṣu
avabhāsasya sadbhāve 'py atītatvāt tathā sthitiḥ
— सुख आदि के विषय में; — और; — सुख आदि के कारणों के विषय में; — और भी; — (वास्तविक) वस्तुओं के विषय में; — आभास की; — सत्ता (विद्यमानता) होने पर; — भी; — (उनके) अतीत होने के कारण; — उसी प्रकार (अतीत रूप में); — स्थिति, अवस्थान
और सुख आदि के विषय में, सुख आदि के कारणभूत पदार्थों के विषय में, तथा (वास्तविक) वस्तुओं के विषय में भी — यद्यपि उनका आभास (स्मृति में) विद्यमान है — अतीत होने के कारण उनकी स्थिति वैसी ही (अतीत रूप) रहती है।