Verses on the Recognition of the Lord· 8.3 / 11

Verses on the Recognition of the Lord8.3

8.3
सुखादिषु च सौख्यादिहेतुष्व् अपि च वस्तुषु अवभासस्य सद्भावे ऽप्य् अतीतत्वात् तथा स्थितिः ॥३॥
sukhādiṣu ca saukhyādihetuṣv api ca vastuṣu avabhāsasya sadbhāve 'py atītatvāt tathā sthitiḥ
— सुख आदि के विषय में ; — और ; — सुख आदि के कारणों के विषय में ; — और भी ; — (वास्तविक) वस्तुओं के विषय में ; — आभास की ; — सत्ता (विद्यमानता) होने पर ; — भी ; — (उनके) अतीत होने के कारण ; — उसी प्रकार (अतीत रूप में) ; — स्थिति, अवस्थान

और सुख आदि के विषय में, सुख आदि के कारणभूत पदार्थों के विषय में, तथा (वास्तविक) वस्तुओं के विषय में भी — यद्यपि उनका आभास (स्मृति में) विद्यमान है — अतीत होने के कारण उनकी स्थिति वैसी ही (अतीत रूप) रहती है।