Verses on the Recognition of the Lord· 8.2 / 11

Verses on the Recognition of the Lord8.2

8.2
विशेषो ऽर्थावभासस्य सत्तायां न पुनः क्व चित् विकल्पेषु भवेद् भाविभवद्भूतार्थगामिषु ॥२॥
viśeṣo 'rthāvabhāsasya sattāyāṃ na punaḥ kva cit vikalpeṣu bhaved bhāvibhavadbhūtārthagāmiṣu
— विशेष, भेद ; — अर्थ के आभास का ; — सत्ता में (अस्तित्व में) ; — किन्तु नहीं ; — कहीं भी ; — विकल्पों में ; — हो (विधि, √भू) ; — भविष्य, वर्तमान और भूत अर्थों पर विचरण करने वाले (में)

अर्थ के आभास में भेद हो सकता है, किन्तु उसकी सत्ता में कभी कहीं भेद नहीं होता — भविष्य, वर्तमान और भूत अर्थों पर विचरण करने वाले विकल्पों में भी (नहीं)।