Verses on the Recognition of the Lord· 8.1 / 11

Verses on the Recognition of the Lord8.1

8.1
तात्कालिकाक्षसामक्ष्यसापेक्षाः केवलं क्व चित् आभासा अन्यथान्यत्र त्व् अन्धान्धतमसादिषु ॥१॥
tātkālikākṣasāmakṣyasāpekṣāḥ kevalaṃ kva cit ābhāsā anyathānyatra tv andhāndhatamasādiṣu
— उस समय की इन्द्रिय-सामीप्य पर आश्रित ; — केवल, मात्र ; — कुछ स्थलों में ; — आभास ; — अन्यथा ; — अन्य स्थलों में ; — किन्तु ; — अन्धे, गहन अन्धकार आदि में

आभास केवल कुछ स्थलों में ही उस समय की इन्द्रिय-सामीप्य पर आश्रित होते हैं; अन्य स्थलों में — जैसे अन्धे में, गहन अन्धकार आदि में — यह अन्यथा (इस सामीप्य से स्वतन्त्र) होता है।