— इस प्रकार; — अत्यन्त भिन्न अर्थों के आभासों से जड़े हुए (में); — विभु (ईश्वर) में; — सकलंक, दूषित; — निष्कलंक, शुद्ध; — अथवा; — व्यवहार; — अनुभव किया जाता है (कर्मवाच्य, √भू+अनु)
इस प्रकार अत्यन्त भिन्न अर्थों के आभासों से जड़े हुए विभु (ईश्वर) में सकलंक (दूषित) अथवा निष्कलंक (शुद्ध) व्यवहार अनुभव किया जाता है।