Verses on the Recognition of the Lord· 7.1 / 14

Verses on the Recognition of the Lord7.1

7.1
या चैषा प्रतिभा तत्तत्पदार्थक्रमरूषिता अक्रमानन्तचिद्रूपः प्रमाता स महेश्वरः ॥१॥
yā caiṣā pratibhā tattatpadārthakramarūṣitā akramānantacidrūpaḥ pramātā sa maheśvaraḥ
— और यह जो (प्रतिभा) ; — प्रतिभा — प्रकाशमान ज्ञान ; — उस-उस पदार्थ के क्रम से रंजित ; — जिसका स्वरूप अक्रम (क्रम-रहित), अनन्त चित् है ; — प्रमाता ; — वह ; — महेश्वर

और यह जो प्रतिभा है, जो उस-उस पदार्थ के क्रम से रंजित है — उसका जो प्रमाता है, जिसका स्वरूप अक्रम (क्रम-रहित) तथा अनन्त चित् है, वही महेश्वर है।