या चैषा प्रतिभा तत्तत्पदार्थक्रमरूषिता
अक्रमानन्तचिद्रूपः प्रमाता स महेश्वरः ॥१॥
yā caiṣā pratibhā tattatpadārthakramarūṣitā
akramānantacidrūpaḥ pramātā sa maheśvaraḥ
— और यह जो (प्रतिभा); — प्रतिभा — प्रकाशमान ज्ञान; — उस-उस पदार्थ के क्रम से रंजित; — जिसका स्वरूप अक्रम (क्रम-रहित), अनन्त चित् है; — प्रमाता; — वह; — महेश्वर
और यह जो प्रतिभा है, जो उस-उस पदार्थ के क्रम से रंजित है — उसका जो प्रमाता है, जिसका स्वरूप अक्रम (क्रम-रहित) तथा अनन्त चित् है, वही महेश्वर है।