Verses on the Recognition of the Lord· 6.11 / 11

Verses on the Recognition of the Lord6.11

6.11
अत एव यथाभीष्टसमुल्लेखावभासनात् ज्ञानक्रिये स्फुटे एव सिद्धे सर्वस्य जीवतः ॥११॥
ata eva yathābhīṣṭasamullekhāvabhāsanāt jñānakriye sphuṭe eva siddhe sarvasya jīvataḥ
— इसी कारण ; — इच्छानुसार समुल्लेख (प्रतिनिधान) के प्रतिभासित होने से ; — ज्ञान और क्रिया (द्विवचन) ; — स्पष्ट ही (द्विवचन) ; — सिद्ध (द्विवचन, भूत कृदन्त) ; — प्रत्येक के लिए ; — जीवित (प्राणी) के लिए (√जीव्, वर्तमान कृदन्त)

इसी कारण — इच्छानुसार समुल्लेखों (प्रतिनिधानों) के प्रतिभासित होने से — प्रत्येक जीवित प्राणी के लिए ज्ञान और क्रिया स्पष्ट तथा सिद्ध हैं।