Verses on the Recognition of the Lord· 6.10 / 11

Verses on the Recognition of the Lord6.10

6.10
स नैसर्गिक एवास्ति विकल्पे स्वैरचारिणि यथाभिमतसंस्थानाभासनाद् बुद्धिगोचरे ॥१०॥
sa naisargika evāsti vikalpe svairacāriṇi yathābhimatasaṃsthānā-bhāsanād buddhigocare
— वह (आन्तरिक आभास) ; — नैसर्गिक ही, स्वाभाविक रूप से ; — है (√अस्) ; — विकल्प में ; — स्वच्छन्द विचरण करने वाले (में) ; — इच्छानुसार संस्थान (आकार) के प्रतिभासित होने से ; — जिसका गोचर बुद्धि है

वह (आन्तरिक आभास) उस स्वच्छन्द विचरण करने वाले विकल्प में भी नैसर्गिक रूप से विद्यमान है, जिसका गोचर बुद्धि है, क्योंकि उसमें इच्छानुसार संस्थान (आकार) प्रतिभासित होते हैं।