kiṃ tu naisargiko jñāne bahirābhāsanātmani
pūrvānubhavarūpas tu sthitaḥ sa smaraṇādiṣu
— किन्तु, परन्तु; — नैसर्गिक, स्वाभाविक (आभास); — (प्रत्यक्ष) ज्ञान में; — जिसका स्वरूप बाह्य प्रकाशन है; — पूर्व अनुभव के रूप में; — किन्तु, जबकि; — स्थित (भूत कृदन्त); — वह (आन्तरिक आभास); — स्मरण आदि में
किन्तु बाह्य प्रकाशन-स्वरूप (प्रत्यक्ष) ज्ञान में वह (आन्तरिक आभास) नैसर्गिक (स्वाभाविक) है; जबकि स्मरण आदि में वह पूर्व अनुभव के रूप में स्थित रहता है।