Verses on the Recognition of the Lord· 6.9 / 11

Verses on the Recognition of the Lord6.9

6.9
किं तु नैसर्गिको ज्ञाने बहिराभासनात्मनि पूर्वानुभवरूपस् तु स्थितः स स्मरणादिषु ॥९॥
kiṃ tu naisargiko jñāne bahirābhāsanātmani pūrvānubhavarūpas tu sthitaḥ sa smaraṇādiṣu
— किन्तु, परन्तु ; — नैसर्गिक, स्वाभाविक (आभास) ; — (प्रत्यक्ष) ज्ञान में ; — जिसका स्वरूप बाह्य प्रकाशन है ; — पूर्व अनुभव के रूप में ; — किन्तु, जबकि ; — स्थित (भूत कृदन्त) ; — वह (आन्तरिक आभास) ; — स्मरण आदि में

किन्तु बाह्य प्रकाशन-स्वरूप (प्रत्यक्ष) ज्ञान में वह (आन्तरिक आभास) नैसर्गिक (स्वाभाविक) है; जबकि स्मरण आदि में वह पूर्व अनुभव के रूप में स्थित रहता है।