bhinne prakāśe cābhinne saṃkaro viṣayasya tat
prakāśātmā prakāśyo 'rtho nāprakāśaś ca siddhyati
— (प्रकाश के अर्थ से) भिन्न होने पर; — प्रकाश के (होने पर); — और; — अथवा अभिन्न होने पर; — संकर — मिश्रण, गड्डबड़; — विषय का; — इसलिए; — प्रकाश-स्वरूप, जिसका आत्मा प्रकाश है; — प्रकाश्य — प्रकाशित किया जाने वाला; — अर्थ; — नहीं; — अप्रकाश, प्रकाश-रहित; — और; — सिद्ध होता है (√सिध्)
प्रकाश को (अर्थ से) भिन्न मानें अथवा अभिन्न — दोनों ही दशाओं में विषय का संकर (मिश्रण) हो जाएगा; इसलिए प्रकाश्य अर्थ प्रकाश-स्वरूप ही है, और अप्रकाश अर्थ सिद्ध नहीं हो सकता।