Verses on the Recognition of the Lord· 5.18 / 21

Verses on the Recognition of the Lord5.18

5.18
मायाशक्त्या विभोः सैव भिन्नसंवेद्यगोचरा कथिता ज्ञानसंकल्पाध्यवसायादिनामभिः ॥१८॥
māyāśaktyā vibhoḥ saiva bhinnasaṃvedyagocarā kathitā jñānasaṃkalpā-dhyavasāyādināmabhiḥ
— माया-शक्ति के द्वारा ; — विभु (ईश्वर) का ; — वही (विमर्श) ; — भिन्न संवेद्य (विषयों) को गोचर बनाने वाला ; — कथिता — कहा जाता है (भूत कृदन्त) ; — ज्ञान, संकल्प, अध्यवसाय आदि नामों से

माया-शक्ति के द्वारा विभु (ईश्वर) का वही (विमर्श), भिन्न संवेद्य (भिन्न विषयों) को गोचर बनाते हुए, ज्ञान, संकल्प, अध्यवसाय आदि नामों से कहा जाता है।