Verses on the Recognition of the Lord· 5.19 / 21

Verses on the Recognition of the Lord5.19

5.19
साक्षात्कारक्षणे ऽप्य् अस्ति विमर्शः कथम् अन्यथा धावनाद्य् उपपद्येत प्रतिसंधानवर्जितम् ॥१९॥
sākṣātkārakṣaṇe 'py asti vimarśaḥ katham anyathā dhāvanādy upapadyeta pratisaṃdhānavarjitam
— साक्षात्कार (प्रत्यक्ष) के क्षण में ; — भी ; — है (√अस्) ; — विमर्श ; — कैसे (अन्यथा)? ; — अन्यथा, नहीं तो ; — दौड़ना आदि (सोद्देश्य क्रिया) ; — सम्भव हो (विधि, √पद्+उप, आत्मनेपद) ; — प्रतिसन्धान (संयोजन) से रहित

साक्षात्कार (प्रत्यक्ष) के क्षण में भी विमर्श विद्यमान रहता है; अन्यथा प्रतिसन्धान (संयोजन) से रहित दौड़ना आदि (सोद्देश्य क्रियाएँ) कैसे सम्भव हों?