Verses on the Recognition of the Lord· 5.20 / 21

Verses on the Recognition of the Lord5.20

5.20
घटो ऽयम् इत्य् अध्यवसा नामरूपातिरेकिणी परेशशक्तिर् आत्मेव भासते न त्व् इदन्तया ॥२०॥
ghaṭo 'yam ity adhyavasā nāmarūpātirekiṇī pareśaśaktir ātmeva bhāsate na tv idantayā
— 'यह घट है' ; — इति — इस रूप में ; — अध्यवसा — निश्चयात्मक ज्ञान ; — नाम और रूप से अतिरिक्त (परे) ; — परमेश्वर की शक्ति ; — आत्मा के समान ; — प्रतिभासित होती है (√भास्, आत्मनेपद) ; — किन्तु नहीं ; — इदन्ता (इस-पन, विषयता) रूप में

'यह घट है' इस रूप का अध्यवसाय (निश्चय), नाम और रूप से अतिरिक्त (परे), परमेश्वर की शक्ति है, और वह आत्मा के समान ही प्रकाशित होता है, इदन्ता (इस-पन, विषयता) रूप में नहीं।