Verses on the Recognition of the Lord· 5.21 / 21

Verses on the Recognition of the Lord5.21

5.21
केवलं भिन्नसम्वेद्यदेशकालानुरोधतः ज्ञानस्मृत्यवसायादि सक्रमं प्रतिभासते ॥२१॥
kevalaṃ bhinnasamvedyadeśakālānurodhataḥ jñānasmṛtyavasāyādi sakramaṃ pratibhāsate
— केवल, मात्र ; — भिन्न संवेद्यों, देशों और कालों के अनुरोध से ; — ज्ञान, स्मृति, अध्यवसाय आदि ; — क्रम-सहित, क्रमिक रूप में ; — प्रतिभासित होते हैं (√भास्+प्रति, आत्मनेपद)

केवल भिन्न संवेद्यों, देशों और कालों के अनुरोध से ही ज्ञान, स्मृति, अध्यवसाय आदि क्रम-सहित (क्रमिक रूप में) प्रतिभासित होते हैं।