ahaṃpratyavamarśo yaḥ prakāśātmāpi vāgvapuḥ
nāsau vikalpaḥ sa hy ukto dvayākṣepī viniścayaḥ
— 'अहम्' का प्रत्यवमर्श (आत्म-विमर्श); — जो; — प्रकाश-स्वरूप; — यद्यपि, होते हुए भी; — वाक्-स्वरूप, जिसका शरीर वाणी है; — नहीं; — वह (अहं-विमर्श); — विकल्प; — वह (विकल्प); — क्योंकि, निश्चय ही; — कहा गया है (भूत कृदन्त); — द्वैत का आक्षेप करने वाला; — विनिश्चय — निश्चयात्मक ज्ञान
'अहम्' का जो प्रत्यवमर्श है, जो प्रकाश-स्वरूप होते हुए भी वाक्-स्वरूप है — वह विकल्प नहीं है; क्योंकि विकल्प तो वह कहा गया है जो द्वैत का आक्षेप करने वाला निश्चय हो।