Verses on the Recognition of the Lord· 6.2 / 11

Verses on the Recognition of the Lord6.2

6.2
भिन्नयोर् अवभासो हि स्याद् घटाघटयोर् द्वयोः प्रकाशस्येव नान्यस्य भेदिनस् त्व् अवभासनम् ॥२॥
bhinnayor avabhāso hi syād ghaṭāghaṭayor dvayoḥ prakāśasyeva nānyasya bhedinas tv avabhāsanam
— दो भिन्न (वस्तुओं) का ; — अवभास, प्रतिभास ; — क्योंकि, निश्चय ही ; — होना चाहिए (विधि, √अस्) ; — घट और अघट का ; — दोनों का ; — प्रकाश (चैतन्य) के समान ; — नहीं ; — अन्य (निषिद्ध वस्तु) का ; — जो भिन्न है ; — किन्तु, परन्तु ; — अवभासन — (पृथक्) प्रकाशन

क्योंकि (विकल्प में) घट और अघट — इन दो भिन्न वस्तुओं का अवभास होना चाहिए; किन्तु उस अन्य, भिन्न (निषिद्ध) वस्तु का (पृथक्) अवभास नहीं होता — जैसे प्रकाश (चैतन्य) का (स्वयं प्रकाशन होता है)।