bhinnayor avabhāso hi syād ghaṭāghaṭayor dvayoḥ
prakāśasyeva nānyasya bhedinas tv avabhāsanam
— दो भिन्न (वस्तुओं) का; — अवभास, प्रतिभास; — क्योंकि, निश्चय ही; — होना चाहिए (विधि, √अस्); — घट और अघट का; — दोनों का; — प्रकाश (चैतन्य) के समान; — नहीं; — अन्य (निषिद्ध वस्तु) का; — जो भिन्न है; — किन्तु, परन्तु; — अवभासन — (पृथक्) प्रकाशन
क्योंकि (विकल्प में) घट और अघट — इन दो भिन्न वस्तुओं का अवभास होना चाहिए; किन्तु उस अन्य, भिन्न (निषिद्ध) वस्तु का (पृथक्) अवभास नहीं होता — जैसे प्रकाश (चैतन्य) का (स्वयं प्रकाशन होता है)।