Verses on the Recognition of the Lord· 6.3 / 11

Verses on the Recognition of the Lord6.3

6.3
तदतत्प्रतिभाभाजा मात्रैवातद्व्यपोहनात् तन्निश्चयनमुक्तो हि विकल्पो घट इत्य् अयम् ॥३॥
tadatatpratibhābhājā mātraivātadvyapohanāt tanniścayanamukto hi vikalpo ghaṭa ity ayam
— 'तत्' और 'अतत्' की प्रतिभा के भागी (संवित्) द्वारा ; — केवल (संवित्) मात्र से ; — अतत् (न-घट) के व्यपोहन (बहिष्कार) के कारण ; — 'तत्' के निश्चय रूप में कहा गया ; — निश्चय ही ; — विकल्प ; — 'घट' ; — इति — इस प्रकार ; — यह

'घट' यह विकल्प, जो 'तत्' के निश्चय रूप में कहा जाता है, केवल संवित् (चैतन्य) से ही — जो 'तत्' और 'अतत्' की प्रतिभा का भागी है — अतत् (न-घट) के व्यपोहन (बहिष्कार) द्वारा (उत्पन्न होता है)।