— नहीं (खण्डन होता); — 'अहन्ता' आदि के परामर्श के भेद से; — इसका, उसका; — जिसका स्वरूप (इससे) दूर नहीं ले जाया जाता; — 'अहम्'-मृश्य रूप में ही ('मैं' के रूप में विमर्श का विषय); — इसकी, उसकी; — सृष्टि (की); — तिङन्त (क्रिया-पद) में वाच्य कर्म के समान
'अहन्ता' आदि के परामर्श के भेद से (उसका स्वातन्त्र्य खण्डित) नहीं होता, क्योंकि उसका स्वरूप (इससे) अपने से दूर नहीं ले जाया जाता; उसकी सृष्टि 'अहम्' के रूप में ही मृश्य (विमर्श का विषय) है — जैसे तिङन्त (क्रिया-पद) में वाच्य कर्म।