— स्वातन्त्र्य से (विमुक्त प्रतीत होने वाले) आत्माओं को; — (अपने ही) स्वातन्त्र्य से; — अद्वय-स्वरूप (का); — प्रभु — स्वामी; — 'ईश' आदि संकल्पों के द्वारा (सीमित प्रमाता); — निर्माण करके (पूर्वकालिक क्रिया, √मा+निर्); — व्यवहार में प्रवृत्त करे (विधि, प्रेरणार्थक, √हृ+वि-अव)
अपने स्वातन्त्र्य से ही अद्वय-स्वरूप वह प्रभु 'ईश' आदि संकल्पों के द्वारा स्वातन्त्र्य से रहित प्रतीत होने वाले आत्माओं को रचकर उन्हें व्यवहार में प्रवृत्त करता है।