ātmānam ata evāyaṃ jñeyīkuryāt pṛthaksthiti
jñeyaṃ na tu tadaunmukhyāt khaṇḍyetāsya svatantratā
— अपने को, आत्मा को; — इसी कारण; — यह (ईश्वर); — ज्ञेय बना सकता है (विधि, च्वि+√कृ); — पृथक् स्थित; — ज्ञेय (वस्तु); — किन्तु नहीं; — उस (आत्म-ज्ञेयीकरण) की ओर उन्मुख होने से; — खण्डित हो (विधि, कर्मवाच्य, √खण्ड्); — इसका; — स्वतन्त्रता
इसी कारण वह (ईश्वर) अपने को ज्ञेय बना सकता है — किन्तु पृथक् स्थित ज्ञेय नहीं; क्योंकि इस (आत्म-)ज्ञेयीकरण की ओर उन्मुख होने से उसका स्वातन्त्र्य खण्डित नहीं होता।