Verses on the Recognition of the Lord· 5.11 / 21

Verses on the Recognition of the Lord5.11

5.11
स्वभावम् अवभासस्य विमर्शं विदुर् अन्यथा प्रकाशो ऽर्थोपरक्तो ऽपि स्फटिकादिजडोपमः ॥११॥
svabhāvam avabhāsasya vimarśaṃ vidur anyathā prakāśo 'rthoparakto 'pi sphaṭikādijaḍopamaḥ
— स्वभाव (रूप में) ; — अवभास (प्रकाश) का ; — विमर्श (को) ; — जानते हैं (परोक्ष भूत, √विद्) — ज्ञानी जन ; — अन्यथा, नहीं तो ; — प्रकाश (केवल प्रकाश-मात्र) ; — अर्थ से उपरक्त (रंजित) ; — भी ; — स्फटिक आदि जड़ के समान (होता)

ज्ञानी जन विमर्श को ही अवभास (प्रकाश) का स्वभाव जानते हैं; अन्यथा प्रकाश, अर्थ से उपरक्त (रंजित) होकर भी, स्फटिक आदि जड़ पदार्थ के समान ही (होता)।