svāminaś cātmasaṃsthasya bhāvajātasya bhāsanam
asty eva na vinā tasmād icchāmarśaḥ pravartate
— स्वामी (ईश्वर) के लिए; — और; — अपने में स्थित; — भाव-समूह का; — भासन — प्रकाशन; — है ही (√अस्); — नहीं; — उस (प्रकाशन) के बिना; — उससे, इसलिए; — इच्छा का विमर्श ('मैं ऐसा करूँ'); — प्रवृत्त होता है (√वृत्+प्र, आत्मनेपद)
और स्वामी (ईश्वर) के लिए अपने में स्थित भाव-समूह का प्रकाशन है ही; क्योंकि उसके बिना इच्छा का विमर्श ('मैं ऐसा करूँ') प्रवृत्त नहीं हो सकता।