Verses on the Recognition of the Lord· 4.8 / 8

Verses on the Recognition of the Lord4.8

4.8
तन् मया दृश्यते दृष्टो ऽयं स इत्य् आमृशत्य् अपि ग्राह्यग्राहकताभिन्नाव् अर्थौ भातः पमातरि ॥८॥
tan mayā dṛśyate dṛṣṭo 'yaṃ sa ity āmṛśaty api grāhyagrāhakatābhinnāv arthau bhātaḥ pamātari
— इसलिए, इस प्रकार ; — 'यह मेरे द्वारा देखा जा रहा है' (कर्मवाच्य) ; — 'यह वही है जो देखा था' ; — इति — इस प्रकार ; — विमर्श करता है (√मृश्+आ) ; — भी, यहाँ तक कि ; — ग्राह्यता और ग्राहकता रूप में विभक्त दोनों ; — दोनों अर्थ (विषय और विषयी) ; — प्रतिभासित होते हैं (द्विवचन, √भा) ; — (एक) प्रमाता में

इस प्रकार वह (प्रमाता) 'यह मेरे द्वारा देखा जा रहा है' और 'यह वही है जो (पहले) देखा था' — ऐसा विमर्श भी करता है; और ग्राह्यता तथा ग्राहकता रूप में विभक्त दोनों अर्थ (विषय और विषयी) एक ही प्रमाता में प्रतिभासित होते हैं।