smaryate yad dṛg āsīn me saivam ity api bhedataḥ
tad vyākaraṇam evāsyā mayā dṛṣṭam iti smṛteḥ
— स्मरण किया जाता है (कर्मवाच्य, √स्मृ); — जो, अर्थात्; — दृक् — ज्ञान (देखना); — था (अनद्यतन भूत, √अस्); — मेरा, मुझे; — वह ऐसा (था); — इति — इस प्रकार; — भी, यद्यपि; — भेद रूप में (पृथक्); — वह; — व्याकरण — विस्तृत प्रकटन, उद्घाटन; — ही, केवल; — इस (स्मृति) का; — मेरे द्वारा; — देखा गया (कर्मवाच्य भूत कृदन्त); — इति — इस प्रकार; — स्मृति का (इस रूप में)
जब यह स्मरण किया जाता है कि 'मेरा एक ज्ञान था, और वह ऐसा था' — यद्यपि (वह) भेद-रूप में (स्थापित होता है) — तब भी वह केवल इस स्मृति का व्याकरण (विस्तृत प्रकटन) ही है, जिसका रूप है 'यह मेरे द्वारा देखा गया'।