Verses on the Recognition of the Lord· 4.2 / 8

Verses on the Recognition of the Lord4.2

4.2
भासयेच् च स्वकाले ऽर्थात् पूर्वाभासितम् आमृशन् स्वलक्षणं घटाभासमात्रेणाथाखिलात्मना ॥२॥
bhāsayec ca svakāle 'rthāt pūrvābhāsitam āmṛśan svalakṣaṇaṃ ghaṭābhāsamātreṇāthākhilātmanā
— प्रकाशित करे (विधि, प्रेरणार्थक, √भास्) ; — और ; — अपने (वर्तमान) काल में ; — अनिवार्यतः, अर्थतः (पंचमी) ; — पूर्व में प्रकाशित (वस्तु को) ; — विमर्श करता हुआ (√मृश्+आ) ; — स्वलक्षण (विशेष वस्तु को) ; — केवल 'घट' इस आभास-मात्र से ; — अथवा ; — सम्पूर्ण स्वरूप से, समग्र रूप में

और अपने ही (वर्तमान) काल में पूर्व में प्रकाशित अर्थ का विमर्श करता हुआ वह (ईश्वर) अनिवार्यतः उस स्वलक्षण को प्रकाशित करता है — चाहे केवल 'घट' इस आभास-मात्र रूप में, अथवा उसके सम्पूर्ण स्वरूप में।