क्रियाप्य् अर्थस्य कायादेस् तत्तद्देशादिजातता
नान्यादृष्टेर् न साप्य् एका क्रमिकैकस्य चोचिता ॥९॥
kriyāpy arthasya kāyādes tattaddeśādijātatā
nānyādṛṣṭer na sāpy ekā kramikaikasya cocitā
— क्रिया; — भी; — अर्थ की; — शरीर आदि की; — उस-उस देश आदि में उत्पन्न होना; — नहीं; — अन्य (इस उत्पत्ति से); — (क्योंकि अन्य) देखा नहीं जाता; — नहीं, न ही; — वह (क्रिया); — भी; — एक (अविभाज्य); — क्रमिक, क्रमयुक्त; — एक (अर्थ) के लिए; — और; — उचित, समुचित
अर्थ की — जैसे शरीर आदि की — क्रिया भी उसका उस-उस देश आदि में उत्पन्न होना मात्र है; क्योंकि इससे अन्य कुछ देखा नहीं जाता। और वह क्रिया एक भी नहीं है, क्योंकि क्रमिक (प्रक्रिया) एक ही (अर्थ) के लिए उचित नहीं है।