— अब (आगे); — अर्थ का; — जैसे; — रूप, आकार; — धारण करती है (√धा, आत्मनेपद); — बुद्धि, ज्ञान; — वैसे ही; — आत्मा का; — चैतन्य (का रूप); — अजड़ होती हुई; — वह (बुद्धि); — इस प्रकार; — जड़ता होने पर; — नहीं, नहीं हो सकता; — अर्थ-प्रकाशता — अर्थों का प्रकाशन
अब, जैसे बुद्धि अर्थ के रूप को धारण करती है, वैसे ही वह आत्मा के चैतन्य को भी धारण करती है; इस प्रकार अजड़ होकर ही वह (अर्थ को प्रकाशित करती है); जड़ता होने पर अर्थ का प्रकाशन नहीं हो सकता।