tatra tatra sthite tat tad bhavatīty eva dṛśyate
nānyan nānyo 'sti saṃbandhaḥ kāryakāraṇabhāvataḥ
— उस-उस (अवस्था) में; — स्थित होने पर (√स्था, अधिकरण कृदन्त); — वह-वह; — उत्पन्न होता है (√भू); — इति — इस प्रकार; — ही, केवल; — देखा जाता है (कर्मवाच्य); — अन्य कुछ नहीं (देखा जाता); — कोई अन्य नहीं (है); — है (√अस्); — सम्बन्ध; — कार्य-कारण-भाव से (भिन्न)
केवल यही देखा जाता है कि उस-उस के स्थित होने पर वह-वह उत्पन्न होता है — इससे अधिक कुछ नहीं दिखता; और कार्य-कारण-भाव से भिन्न कोई अन्य सम्बन्ध नहीं है।