tato bhinneṣu dharmeṣu tatsvarūpāviśeṣatah
saṃskārāt smṛitisiddhau syāt smartā draṣṭeva kalpitaḥ
— इसलिए, अतः; — भिन्न (क्षणिक) में; — धर्मों में (चित्त-वृत्तियों में); — उनके स्वरूप की अभिन्नता (समानता) के कारण; — संस्कार से; — स्मृति की सिद्धि होने पर; — होगा (विधि, √अस्); — स्मर्ता — स्मरण करने वाला; — द्रष्टा के समान (अर्थात् केवल कल्पित); — कल्पित, कल्पना से रचा हुआ
(विरोधी:) इसलिए, भिन्न-भिन्न क्षणिक धर्मों (चित्त-वृत्तियों) में, उनके स्वरूप की समानता के कारण, जब संस्कार से स्मृति सिद्ध होती है, तब 'स्मर्ता' भी 'द्रष्टा' के समान केवल कल्पित (मानी गई वस्तु) ही है।