svasvarūpāparijñānamayo 'nekaḥ pumān mataḥ
tatra sṛṣṭau kriyānandau bhogo duḥkhasukhātmakaḥ
— अपने स्वरूप के अपरिज्ञान से युक्त; — अनेक; — पुमान् — पुरुष (जीव); — माना जाता है (भूत कृदन्त); — वहाँ, उसके लिए; — सृष्टि (क्रिया) में; — क्रिया और आनन्द (द्विवचन); — भोग — अनुभव, सांसारिक भोग; — दुःख और सुख स्वरूप
अपने स्वरूप के अपरिज्ञान से युक्त पुरुष (जीव) अनेक माना जाता है; उसके लिए, सृष्टि (क्रिया) में, क्रिया और आनन्द हैं — (उसका) भोग, जो दुःख और सुख स्वरूप है।