— इति — इस प्रकार; — प्रकट किया गया, प्रकटित (भूत कृदन्त); — मेरे द्वारा; — सुघट — सुस्थापित, सुसंगत; — यह मार्ग; — नया; — महागुरुओं के द्वारा; — कहा गया था (√वच् + स्म, भूत अर्थ में); — शिवदृष्टि शास्त्र (सोमानन्द के ग्रन्थ) में; — जैसा कि; — इसलिए; — यहाँ, इस (मार्ग) में; — रखता हुआ (√धा+नि, वर्तमान कृदन्त); — पद, चरण; — भुवन-कर्तृता (जगत्-स्रष्टृत्व) को; — आत्मा की; — भलीभाँति जानकर, अनुभव करके (पूर्वकालिक क्रिया, प्रेरणार्थक √भू+वि); — शिवतामयी (शिव-स्वरूप को); — निरन्तर, अनवरत; — प्रवेश करता हुआ (√विश्+आ, वर्तमान कृदन्त); — सिद्धि प्राप्त करता है (√सिध्)
इस प्रकार मेरे द्वारा यह सुघट (सुस्थापित) नया मार्ग प्रकट किया गया है, जैसा कि महागुरुओं द्वारा शिवदृष्टि शास्त्र में कहा गया था; इसलिए यहाँ (इस मार्ग में) पद रखकर, आत्मा की शिवतामयी (शिव-स्वरूप) भुवन-कर्तृता (जगत्-स्रष्टृत्व) को भलीभाँति जानकर, निरन्तर (उसमें) प्रवेश करता हुआ (साधक) सिद्धि प्राप्त करता है।