एवम् आत्मानम् एतस्य सम्यग्ज्ञानक्रिये तथा
जानन् यथेप्सितान् पश्यञ् जानाति च करोति च ॥१५॥
evam ātmānam etasya samyagjñānakriye tathā
jānan yathepsitān paśyañ jānāti ca karoti ca
— इस प्रकार; — आत्मा को; — इस (ईश्वर) का; — सम्यक् ज्ञान और क्रिया (को) (द्विवचन); — उसी प्रकार; — जानता हुआ (√ज्ञा, वर्तमान कृदन्त); — इच्छानुसार (वस्तुओं को); — देखता हुआ (√पश्, वर्तमान कृदन्त); — (सचमुच) जानता है (√ज्ञा); — और (सचमुच) करता है (√कृ)
इस प्रकार इस (ईश्वर) के आत्मा को तथा उसी प्रकार उसके सम्यक् ज्ञान और क्रिया को जानता हुआ, इच्छानुसार (वस्तुओं को) देखता हुआ, वह (प्रत्यभिज्ञाता) सचमुच जानता है और सचमुच करता है।