sarvathā tv antarālīnā-nantatattvaughanirbharaḥ
śivaḥ cidānandaghanaḥ paramākṣaravigrahaḥ
— सब प्रकार से, पूर्णतः; — किन्तु; — भीतर लीन हुए अनन्त तत्त्वों के समूह से परिपूर्ण; — शिव; — चित् और आनन्द का घन (सघन पुंज); — जिसका विग्रह (शरीर) परम अक्षर है
किन्तु शिव, सब प्रकार से भीतर लीन हुए अनन्त तत्त्वों के समूह से परिपूर्ण, चित् और आनन्द का घन (सघन पुंज) है, जिसका विग्रह (शरीर) परम अक्षर है।