Verses on the Recognition of the Lord· 15.13 / 18

Verses on the Recognition of the Lord15.13

15.13
मेयं साधारणं मुक्तः स्वात्माभेदेन मन्यते महेश्वरो यथा बद्धः पुन अत्यन्तभेदवत् ॥१३॥
meyaṃ sādhāraṇaṃ muktaḥ svātmābhedena manyate maheśvaro yathā baddhaḥ puna atyantabhedavat
— ज्ञेय (को) ; — साधारण, साझा ; — मुक्त (पुरुष) (भूत कृदन्त) ; — अपने आत्मा से अभिन्न रूप में ; — मानता है (√मन्, आत्मनेपद) ; — महेश्वर ; — जैसे, के समान ; — बद्ध (पुरुष) (भूत कृदन्त) ; — इसके विपरीत, फिर ; — अत्यन्त भिन्न रूप में

मुक्त पुरुष साधारण (साझे) ज्ञेय को अपने आत्मा से अभिन्न मानता है, जैसे महेश्वर (मानता है); किन्तु बद्ध, इसके विपरीत, (उसे) अत्यन्त भिन्न रूप में (मानता है)।