Verses on the Recognition of the Lord· 15.11 / 18

Verses on the Recognition of the Lord15.11

15.11
साधारणो ऽन्यथा चैशः सर्गः स्पष्टावभासनात् विकल्पहानैकाग्र्यात् क्रमेणेश्वरतापदम् ॥११॥
sādhāraṇo 'nyathā caiśaḥ sargaḥ spaṣṭāvabhāsanāt vikalpahānaikāgryāt krameṇeśvaratāpadam
— साधारण, साझी ; — अन्यथा (दूसरे प्रकार से) ; — और ; — ईश (ईश्वर) की ; — सर्ग — सृष्टि ; — (उसके) स्पष्ट प्रकाशन के कारण ; — विकल्पों के त्याग की एकाग्रता से ; — क्रमशः, क्रम से ; — ईश्वरता का पद

— और अन्य प्रकार से, ईश की सृष्टि साधारण (साझी) है, क्योंकि उसका स्पष्ट प्रकाशन होता है; विकल्पों के त्याग की एकाग्रता से क्रमशः ईश्वरता का पद (प्राप्त होता है)।