Verses on the Recognition of the Lord· 15.10 / 18

Verses on the Recognition of the Lord15.10

15.10
स्वविश्रान्त्युपरोधायाचलया प्राणरूपया विकल्पक्रियया तत्तद्वर्णवैचित्र्यरूपया ॥१०॥
svaviśrāntyuparodhāyā-calayā prāṇarūpayā vikalpakriyayā tattadvarṇavaicitryarūpayā
— आत्मा में विश्रान्ति का उपरोध (विरोध) करने के लिए (प्रवृत्त) ; — अचल (निरन्तर सक्रिय) ; — प्राण-स्वरूप ; — विकल्प की क्रिया से ; — उस-उस वर्ण (अक्षर) की विचित्रता रूप

(वह निजी सृष्टि) विकल्प की क्रिया से (प्रवृत्त होती है), जो आत्मा में विश्रान्ति का उपरोध (विरोध) करने वाली, अचल (निरन्तर सक्रिय), प्राण-स्वरूप तथा उस-उस वर्ण (अक्षर) की विचित्रता रूप है —